यादों के झरोखे

ताज़ायादों के झरोखे

हबीब तनवीर ने रंगमंच को आम आदमी के लिए खोला और खेला

जीवेश चौबे/ प्रख्यात रंगकर्मी, निर्देशक, अभिनेता हबीब तनवीर का यह जन्म शताब्दी वर्ष है. उनका जन्म 1 सितंबर 1923 को

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यादों के झरोखे

67 साल पहले शराबबंदी के लिए शुरू हुआ था आंदोलन एक महिला की जिद के सामने झुकी थी सरकार

छत्तीसगढ़ गाथा डेस्क/ छत्तीसगढ़ में 28 मार्च 1953 को शराबबंदी के खिलाफ एक बड़े आंदोलन की शुरूआत हुई थी और

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ताज़ायादों के झरोखे

बीए तक पढ़े थे ‘मास्टर जी’ और एमए की कक्षाओं में पढ़ाए जाते थे उनके लिखे निबंध

छत्तीसगढ़ गाथा डेस्क/ मास्टर जी यानी पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी. बख्शी जी छत्तीसगढ़ ही नहीं देश के महान साहित्यकारों में से

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यादों के झरोखे

किशोर साहू: मीना कुमारी के नायक नहीं बन सकें, लेकिन ‘दिल अपना और प्रीत पराई’ ने मचाई धूम

रमेश अनुपम/ हिंदी सिनेमा के महान शख्सियत, अभिनेता, निर्माता, निर्देशक, पटकथा लेखक, साहित्यकार, चित्रकार किशोर साहू का आज (22 अक्टूबर)

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यादों के झरोखे

इंदिरा गांधी का इंतजार करते कड़ाके की ठंड में रात 2 बजे तक डटी रही भिलाई की जनता

मुहम्मद जाकिर हुसैन/ पूर्व प्रधानमंत्री स्वं. इंदिरा गांधी का भिलाई से आत्मीय लगाव रहा है. 9 फरवरी 1963 को इंदिरा

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यादों के झरोखे

जिनके प्रयासों से फैली ‘चंदैनी गोंदा’ की खुशबू

छत्तीसगढ़ गाथा डेस्क/ छत्तीसगढ़ अंचल में सांस्कृतिक पुनर्जागरण के अग्रदूत तथा कला जगत के धूमकेतु की उपमा से विभूषित दाऊ

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