पीयूष कुमार/ मुझे कृष्ण का गौपालक रूप बहुत प्रिय है. खासतौर से सूरदास और रसखान रचित. ब्रज के आलोक में जिस लोक का उन्होंने वर्णन किया है, वह अद्भुत है. 15वीं सदी में सूरदास के काव्य में गोपियां रास कर रही हैं. यह नागर समाज के हिसाब से क्रांतिकारी चित्रणContinue Reading

पीयूष कुमार/ प्रकृति ने सभी के लिए बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति की व्यवस्था की है. बुद्धिशील मनुष्य के लिए यह आवश्यकता कम थी, अत: उसने स्वयं के लिए भोजन उत्पादन का उपाय खोजने का प्रयास किया. इसी क्रम में उसने कृषि प्रक्रिया का अविष्कार किया और यह उसके जीवन काContinue Reading

पीयूष कुमार/ छेरछेरा छत्तीसगढ़ का स्थानीय त्योहार है. यह परम्परा दान से जुड़ी है. यहां दान याचक और दाता के भाव का नहीं है, बल्कि जो अपने पास है, वह बांटने की भावना से पूरित है. छत्तीसगढ़ में ‘छेरछेरा’ के आरंभ को लेकर रतनपुर के राजा कल्याण साय की लोककथाContinue Reading

पीयूष कुमार/ लोक में एक विशेष चरित्र हमेशा रहा है जो किसी रिश्ते के नाम से समाज में चर्चित रहता है. यह जगत मामा, भैया, कका, बबा या फूफा आदि रूपों में अपने आसपास को प्रभावित किये रहता है. इसी तरह एक चरित्र साकार हुआ है राहुल सिंह जी कीContinue Reading