पीयूष कुमार/ प्रकृति ने सभी के लिए बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति की व्यवस्था की है. बुद्धिशील मनुष्य के लिए यह आवश्यकता कम थी, अत: उसने स्वयं के लिए भोजन उत्पादन का उपाय खोजने का प्रयास किया. इसी क्रम में उसने कृषि प्रक्रिया का अविष्कार किया और यह उसके जीवन काContinue Reading

छत्तीसगढ़ गाथा डेस्क/ ‘‘तमिल में एक कहावत है- ‘दौड़ कर दूध पीने से बेहतर है चल कर पानी पीना’. मेरी यात्रा चलने की है, दौड़ने की नहीं. दौड़ते हुए आप बहुत बहुत सारी चीजों को नजरअंदाज कर देते हैं, छोड़ देते हैं. मैं चलते हुए अपनी यात्रा के रास्ते मेंContinue Reading

छत्तीसगढ़ गाथा डेस्क/ ‘मैं आज 68 साल की हो गई हूं. जब छोटी थी तब लड़कियों के लिए गाना-बजाना बहुत मुश्किल था. तब मैंने पंडवानी को गले लगाया क्योंकि मेरी हिम्मत बहुत बड़ी थी. मैंने ठान लिया था कि मुझे करना है मतलब करना है. दुनिया ने लाख ताने मारे,Continue Reading

पीयूष कुमार/ लोक में एक विशेष चरित्र हमेशा रहा है जो किसी रिश्ते के नाम से समाज में चर्चित रहता है. यह जगत मामा, भैया, कका, बबा या फूफा आदि रूपों में अपने आसपास को प्रभावित किये रहता है. इसी तरह एक चरित्र साकार हुआ है राहुल सिंह जी कीContinue Reading