कनक तिवारी/ 28 सितंबर, 1991 को आखिरकार शंकर गुहा नियोगी की हत्या कर ही दी गई. जिंदगी और मौत के बीच एक जोखिम भरे व्यक्तित्व ने अपनी आखिरी सांस उन मजदूर साथियों के लिए तोड़ दी, जिनके लिए नियोगी का नाम अमर रहेगा. रात के घने अंधकार में छत्तीसगढ़ केContinue Reading

छत्तीसगढ़ गाथा डेस्क/ ‘मैं आज 68 साल की हो गई हूं. जब छोटी थी तब लड़कियों के लिए गाना-बजाना बहुत मुश्किल था. तब मैंने पंडवानी को गले लगाया क्योंकि मेरी हिम्मत बहुत बड़ी थी. मैंने ठान लिया था कि मुझे करना है मतलब करना है. दुनिया ने लाख ताने मारे,Continue Reading